Sunday, 6 January 2013

मुझे लिखना है............


सुनो,
कोई मुझे लिखना सिखा दो,
मैं लिखना चाहती हूँ ,
मुझे लिखना है--

उस रात के बारे में,
कितना अँधेरा था,
जब सधः प्रसव पीड़ा मुक्त,
मेरी माँ को,
दाई ने कहा होगा,
"एक और प्रसव पीड़ा बाकी है अभी तुम्हारे हिस्से मे"

मैं लिखना चाहती हूँ,
अपना बचपन,
गुड्डे गुड़ियों/ अभावों में शहंशाही

अपनी अनपढ़ माँ और उसके सपनो की मोटी किताबों के बारे में,
अपने पिता और हर रिश्ते पर भारी पड़ती उनकी महत्वाकांक्षा के बारे में,

मुझ धर्म पर नहीं लिखना|
अध्यात्म पर भी नहीं|
भूख और गरीबी पर तो बिलकुल नहीं|
राजनीती/ कूटनीति समझ ही नहीं आती मुझे|

मुझे तो बस लिखना है खुद के बारे में,
श्वेत अश्व/ राजकुमार ,
कसौटियों/ टूटते विश्वास,
के साथ परिपक्व होते छल के बारे में,
कोई मुझे लिखना सिखा दो|
मुझे लिखना है............

-मृदुला शुक्ला

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