Tuesday, 26 March 2013

नैन

नैन कहते रहे, नैन सुनते रहे,
नैन ही नैन मे मुस्कुराते रहे|


वेदना की सभी मधुर अभिव्यक्तिया,
नैन ही नैन मे गुनगुनाते रहे|

गीत भी नैन हैं नैन ही साज हैं,
सात स्वर नैन है नैन झंकार हैं|

नैन श्रृंगार हैं नैन संहार हैं,
दंड भी नैन हैं नैन उपहार हैं |

नैन ही नैन मैं रूठ जाते हैं वो,
नैन ही नैन मे हम मनाते रहे|

नैन चटक लगे नैन सीपी लगे,
स्वाति की बूँद से इनमे मोती जगे|

नैन कान्हा लगे नैन राधा लगे,
नैन सम्पूर्णता नैन आधा लगे|

मन की अनुभूतियाँ धडकनों मे जगे,
नैन ही नैन विस्तार पाते रहे |

                                                                    -मृदुला शुक्ला

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